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अदालत की अवमानना in English
[ adalat ki avamanana ] sound:
अदालत की अवमानना sentence in Hindi
Examples
More: Next- CONVICTED : Author Arundhati Roy , by the Supreme Court , for contempt of court .
सजाः लेखिका अरुंधती रॉय को अदालत की अवमानना के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सजा दी . - ” In the case before us , the persons charged with contempt have at once admitted their guilt , and have expressed their deep regret at having unwittingly cast an undeserved slur upon a learned judge of this court .
” मौजूदा मुकदमे में , अदालत की अवमानना करने के दोषी व्यक्तियों ने फौरन अपना अपराध स्वीकर कर लिया और अदालत के एक विद्वान न्यायाधीश पर अनजाने में , झूठा आक्षेप करने पर गहरा अफसोस जाहिर किया . - ” In the case before us , the persons charged with contempt have at once admitted their guilt , and have expressed their deep regret at having unwittingly cast an undeserved slur upon a learned judge of this court .
” मौजूदा मुकदमे में , अदालत की अवमानना करने के दोषी व्यक्तियों ने फौरन अपना अपराध स्वीकर कर लिया और अदालत के एक विद्वान न्यायाधीश पर अनजाने में , झूठा आक्षेप करने पर गहरा अफसोस जाहिर किया . - In the history of British judiciary in India it was for the first time such a severe sentence was imposed on a public man for contempt of the court , who had fully explained the position and expressed regrets .
भारत में ब्रिटिश न्याय व्यवस्था के इतिहास में यह पहला अवसर था जब अदालत की अवमानना के अपराध में किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को , उसकी क्षमा-प्रार्थना और स्पष्टीकरण के बावजूद , इतनी कड़ी सजा दी गयी थी . - On 3rd May , 1883 , a notice for contempt was issued against Surendra Nath Banerjea and one Ramcoomar Dey -LRB- the publisher and printer of the newspaper , The Bengalee -RRB- by the Calcutta High Court calling upon them to show cause on 4th May , 1883 , giving only one day 's time .
3 मऋ 1883 को सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और रामकुमार डे ह्य ' द बंगाली ' पत्र के प्रकाशक और मुद्रकहृ को उच्च न्यायालय द्वारा अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया गया और उन्हें आदेश दिया गया कि 4 मऋ 1883 को , अर्थात एक दिन के भीतर वे यह बताएं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया ऋ - ” In the first mentioned case , Sir Barnes Peacock , C.J . , in delivering the judgment , said : ' Although the majority of the judges were of the opinion that both these gentlemen , i.e . the persons charged with contempt , had acted in contempt of court , they did not wish to visit the offence with any punishment .
” उपरोक्त पहले मुकदमे में , मुख्य न्यायाधीश सर बार्नेस पीकॉक ने फैसला सुनाते हुए कहा था : ' हालांकि अधिकांश न्यायाधीशों का मानना था कि ये दोनों व्यक्ति , जिन पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाया गया है , उक्त अपराध के लिए दोषी हैं , फिर भी अदालत उन्हें कोई सजा नहीं देना चारती . - Surendra Nath 's popularity can fee gauged from the fact that there was a total ” hartal ' in Bengal when he was sentenced to imprisonment on the charge of contempt of court for remarks made by him in his paper , ' The Bengalee ' , against the Chief Justice of the Calcutta High Court for ordering a Hindu to produce the image of his household deity in the court .
सुरेन्द्रनाथ की लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब अदालत की अवमानना के आरोप में उन्हें कारावास की सजऋआ सुनायी गयी तो बंगाल में सुरेन्द्रनाथ बनर्जी पूर्ण हडऋताल की गयी.हुआ यह था कि कलक - On the 18th July , 1893 , Justice B . Peacock observed that after carefully examining the provisions of the Code of Criminal Procedure , 1882 , which came into force in January , 1883 , they were clearly of the opinion that notwithstanding the Code , the High Court had jurisdiction to commit the petitioner for a contempt of court in publishing the libel set out in the petition .
18 जुलाई 1893 को न्यायाधीश बी . पीकॉक ने कहा कि जनवरी 1883 में अस्तित्व में आये अपराध प्रक्रिया संहिता 1882 के नियमों को देखते हुए वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि कानून का प्रतिरोध न करते हुए उच्च न्यायालय को यह अधिकार है कि वह याचिका में किये गये अभियोग के लिए प्रार्थी के साथ अदालत की अवमानना के लिए निपटे .